परिचय
गीता गोपाल, अम्बाला छावनी
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धर्म, संस्कृति और सद्विचारों का प्रचार-प्रसार
गीता गोपाल सत्संग भवन में प्रतिदिन रात्रि 10:00 बजे परम श्रद्धेय भैया जी द्वारा दिव्य सत्संग एवं प्रेरणादायी प्रवचन का आयोजन किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने मन की व्यथा, प्रश्न एवं शंकाएँ पूछते हैं, जिनका भैया जी सहजता से समाधान करते हैं। यहाँ बालकों एवं युवाओं को आध्यात्मिक जीवन, उच्च संस्कारों एवं चरित्र-निर्माण की प्रेरणा दी जाती है। इस सत्संग का लाइव प्रसारण ‘Geeta Gopal’ YouTube चैनल पर भी किया जाता है, जहाँ देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़कर श्रद्धालु अपने प्रश्न पूछ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक गुरुवार को सत्संग भवन में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु प्रभु-नाम स्मरण में लीन होते हैं। प्रत्येक शनिवार को पावन यज्ञ का आयोजन किया जाता है। यज्ञ के पवित्र वातावरण के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रवचन एवं भक्तिमय भजनों का यह अद्भुत संगम ‘त्रिवेणी’ कहलाता है, जो सभी को धर्म, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
विक्रमी संवत् नववर्ष
भारतीय संस्कृति में हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से माना जाता है। इसी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से गीता गोपाल संस्था नववर्ष का स्वागत भारतीय परंपराओं और संस्कारों के अनुरूप हर्षोल्लास के साथ करती है।वर्तमान आधुनिक परिवेश में जहाँ नववर्ष का स्वागत प्रायः देर रात तक चलने वाली पार्टियों, नशे एवं पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के साथ किया जाता है, वहीं गीता गोपाल संस्था समाज को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ते हुए नववर्ष का अभिनंदन शंखनाद, ‘हरे कृष्णा’ के जयघोष एवं भक्तिमय वातावरण के साथ करती है।इस पावन अवसर की खुशी को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए संस्था द्वारा अंबाला में प्रसाद का वितरण भी किया जाता है।
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धार्मिक पर्व एवं लोकमंगल
संस्था द्वारा वर्षभर अनेक धार्मिक पर्व श्रद्धा एवं भक्ति से मनाए जाते हैं।
लोहड़ी अर्थात् अग्नि पर्व :
उत्तर भारत के प्रमुख त्यौहार लोहड़ी से भी यह संस्था अछूती नहीं है। गीता जी में भगवान जी ने अग्नि को अपना स्वरूप बताया है। अग्नि में रेवड़ियों, मूंगफलियों व मक्की के दानों की आहुति डालकर भगवान जी को अर्पित किया जाता है व गीता जी के नवम अध्याय का पाठ किया जाता है।
होली:
यह पर्व फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। होली का पर्व हमें भक्त प्रहलाद की याद दिलाता है। जिसने छोटी सी आयु में परमात्मा की भक्ति प्राप्त कर अपने समस्त कुल का उद्धार कराया था। आजकल लोग इस दिन गंदे रंगों से होली खेलते हैं जिससे एक तो त्वचा को हानि होती है दूसरे जल की हानि। संस्था में यह पर्व भगवान जी के साथ फूलों की होली खेलकर व भजन कीर्तन कर मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि :
यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व शहर के इन्दिरा पार्क में पीपल जी के वृक्ष में जल चढ़ाकर व वृक्षारोपण करके मनाया जाता है। यह पर्व रात्रि में सत्संग भवन में भी मनाया जाता है और प्रभु से सभी के मंगल की कामना की जाती है।
श्री कृष्ण महाप्रकटोत्सव :
गीता गोपाल सत्संग भवन में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गीता जी का महायज्ञ कर भारी संख्या में श्रद्धालु, यज्ञकुण्ड में आहुति डालते हैं। भजन, प्रवचन व यज्ञ की त्रिवेणी के स्नान से हर व्यक्ति परम आनंद को प्राप्त करता है।
15 अगस्त- 26 जनवरी देश प्रेम :
यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन संस्था में भी छोटे-बड़े बच्चे देशभक्ति की कविताएं, गीत व नृत्य से सारे भवन को देश प्रेम से भर देते हैं। चारों ओर भारत माता की जय के नारों का उद्घोष हो जाता है। संस्था विभिन्न तिरंगा यात्राओं तथा धार्मिक एवं राष्ट्रभक्ति से संबंधित शोभायात्राओं के स्वागत-सत्कार एवं सेवा में सदैव अग्रणी रहती है तथा यात्रियों एवं श्रद्धालुओं के लिए जल-पानी एवं आवश्यक सेवा की व्यवस्था करती है।
कार्तिक मास :
समस्त पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास को महापुण्यदायी बताया गया है। यह मास गीता गोपाल सत्संग भवन में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कार्तिक मास में हर रोज़ रात को सत्संग के समय गीता जी के नवें अध्याय का यज्ञ, प्रवचन व कीर्तन होता है। ब्रह्मा जी ने भी कार्तिक मास को सर्वोत्तम मास बताया है। सभी व्यक्तियों को कार्तिक मास में भगवान जी का पूजन अवश्य करना चाहिए।
गीता जयंती महोत्सव : मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी “जिस दिन कन्हैया जी ने अर्जुन को गीता जी का उपदेश दिया था”, गीता जयंती के रूप में आज भी यह पर्व गीता गोपाल सत्संग भवन में मनाया जाता है। रात्रि में गीता जी पर प्रवचन, छोटे-छोटे बच्चों द्वारा गीता जी पर प्रस्तुति व अंत में कीर्तन कर सारा सत्संग भवन गूंज उठता है।

